टाइगर उस सबका प्रतीक हैं, जो अद्भुत है, रहस्यपूर्ण और स्वाभाविक है। टाइगर प्रजाति को खो बैठने का अर्थ होगा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से हाथ धो बैठना, जो मनुष्य को वन्य-जगत से जोड़ते हैं। एशिया की संस्कृतियों में टाइगर के बारे में ढ़ेर-सारी दंतकथाएं और जनश्रुतियां मौजूद हैं। डेविड कुआम्मेन के शब्दों में:
''जब तक होमो सैपिएन्स सैपिएन्ट बने रहे हैं, एल्$फा प्रीडेटर्स (परभक्षी) ने मानव जगत में हमें अपने अस्तित्व के प्रति सजग रखा है। उन्होंने ऐसा हमें यह याद दिलाते हुए किया है कि हम उनके लिए एक भिन्न स्वाद वाले मांस से से अधिक कुछ नहीं हैं।''
पारिस्थितिकी की दृष्टि से टाइगर जैसे बड़े जानवरों को उनके अपने प्राकृतिक पर्यावास से हटा देने का परिणाम प्राकृतिक इको-सिस्टम में ऐसे परिवर्तनों के रूप में निकला है, जिन्हें बदला नहीं जा सकता। खाद्य-शृंखला ($फूड चेन) में सबसे ऊपर होने के कारण बड़े परभक्षियों के बड़ी संख्या में लुप्त हो जाने से हिरन जैसे शाकाहारी जानवरों की संख्या में भारी वृद्धि हो जाती है, जिसका बदले में पेड़ों की पुनरुत्पत्ति और बीज-वितरण पर असर पड़ता है। ऐसे प्रभाव खाद्य जगत में दिखलाई पड़ते हैं और जिनका परिणाम प्राकृतिक जीवजंतुओं और वनस्पति में दीर्घकालिक परिवर्तनों के रूप मे निकलता है, जिससे प्रजातियों के विनाश की दिशा में मार्गप्रशस्त होता है। उदाहरण के लिए, मांसाहारी जीवजंतुओं की अनुपस्थिति से अमेरिका के पूर्वी राज्यों में स$फेद पूछ वाले हिरनों, उत्तर भारत में गंगा के मैदानी इलाकों में नीलगायऔर बार्रो कोलोरेडो द्वीप, पनामा, में अगोटिस की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।
वे पर्यावास, जहां वन्य टाइगर रहते हैं, मूल्यवान इको-सिस्टम हैं, जो मनुष्यों को महत्त्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, जैसे कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन, जलवैज्ञानिक संतुलन, परागण (पॉलिनेशन) सेवाएं, प्राकृतिक आपदाओं और मिट्टी के कटाव से रक्षा, औषधीय पौधों में आनुवंशिकीय विविधता, तथा बॉयो-प्रॉस्पेङ्क्षक्टग। उदाहरण के लिए, टाइगरों के पर्यावासों से पर्यटन को आज अरबों डालर का लाभ होता है और इससे विश्व-भर में लाखों-करोड़ों लोगों की रोटी-रोज़ी चलती है। इसके बावजूद, वन्यजीव पर्यटन से अभी तक समुचित लाभ नहीं हो पा रहा है - लोग वर्तमान की तुलना में कई गुना भुगतान करने को तैयार हैं, जिससे इन प्राकृतिक पर्यावासों की आमदनी जुटाने की संभावनाओं का पता चलता है। यह भी प्रदॢशत हो गया है कि प्रकृति से स्थाई तौर पर मिलने वाले लाभ पारिस्थितिकी से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं के रखरखाव और जीवन की विविधता पर निर्भर करते हैं। इसलिए, टाइगरों को लुप्त होने देने से हम आगामी पीढ़ी को निश्चित रूप से प्राकृतिक विविधता के लाभों से वंचित कर देंगे, जो मनुष्य की प्रगति का आधार रही है।
टाइगरों के अनेक पर्यावास उन इलाकों में मौजूद हैं, जिनमें जैव-विविधता काफी अधिक है। इस प्रकार, टाइगरों की उनके पर्यावासों में रक्षा करने से अपने आप ही जीववैज्ञानिक विविधता को भारी लाभ पहुंचेगा। टीसीएल का 71 प्रतिशत विश्व के जैव-विविधता वाले 25 प्रमुख स्थानों में मौजूद है।
अंत में, टाइगर इस बात का सूचक है कि मानव समाज सीमित संसाधनों पर लगातार बढ़ते हुए दबाव की परिस्थितियों में पर्यावरण की गुणवत्ता बनाए रखने के संबंध में क्या कर रहा है। टाइगर की उपस्थिति एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर पाने का मापक-यंत्र होगी - क्या हम भूमंडल को सुरक्षित रखने के लिए सही निर्णय ले रहे हैं?